Saturday, 9 April 2016

".... ये  नाज है के तेरी आरजू में जीते है ....
ये फक्र है के तेरी जात से ताल्लुक है..... "


"...चाँद पागल है अँधेरे में निकल पड़ता है
 रोज तारो की नुमाइश में खल्ल पड़ता है
उनकी याद आती है....साँसों जरा धीरे चलो
धड़कनो से भी इबादत में खल्ल पड़ता है। ...."
 

No comments:

Post a Comment